Baglamukhi Yantra / Enemy Destroy

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माँ बगलामुखी कौन हैं?

माँ बगलामुखी दस महाविद्याओं में से आठवीं महाविद्या हैं। वे शत्रु नाश, वाणी पर नियंत्रण, विजय और रक्षा प्रदान करने वाली देवी हैं। माँ बगलामुखी को “स्तंभन शक्ति” की देवी कहा जाता है, क्योंकि वे शत्रुओं को वाणी, बुद्धि और शक्ति से पराजित कर देती हैं। उनकी साधना विशेष रूप से शत्रु बाधा, न्यायिक मामलों, प्रतियोगिताओं और सफलता प्राप्ति के लिए की जाती है।

 

माँ बगलामुखी का स्वरूप

  • पीले वस्त्र धारण किए हुए और स्वर्णिम आभा से युक्त होती हैं।
  • एक हाथ में गदा और दूसरे हाथ में शत्रु की जिह्वा पकड़ने का प्रतीक।
  • उनका वाहन गरुड़ है, जो गति और शक्ति का प्रतीक है।
  • वे शत्रु नाश, आत्मविश्वास और वाणी पर नियंत्रण प्रदान करती हैं।

 

माँ बगलामुखी का महत्व

  • शत्रु बाधा, मुकदमे और विवादों से मुक्ति देती हैं।
  • राजनीति, व्यवसाय और करियर में सफलता प्रदान करती हैं।
  • मानसिक शांति, आत्मबल और वाणी पर नियंत्रण देती हैं।
  • किसी भी प्रकार की नकारात्मक ऊर्जा और बुरी नजर से रक्षा करती हैं।
  • प्रतियोगी परीक्षाओं, कानूनी मामलों और संघर्षों में विजय दिलाती हैं।

 

माँ बगलामुखी की पूजा के लाभ

  • शत्रु शक्तिहीन हो जाते हैं और हानि नहीं पहुँचा सकते।
  • कानूनी मामलों और मुकदमों में विजय प्राप्त होती है।
  • व्यापार और करियर में आने वाली बाधाएँ दूर होती हैं।
  • राजनीति और प्रशासनिक क्षेत्रों में सफलता मिलती है।
  • आत्मविश्वास और निर्णय लेने की क्षमता बढ़ती है।

 

बगलामुखी यंत्र क्या है?

बगलामुखी यंत्र माँ बगलामुखी की दिव्य शक्ति से संचारित यंत्र है, जो शत्रु नाश, वाणी पर नियंत्रण, कानूनी विजय और आत्मबल को बढ़ाने में सहायक होता है। इसे घर, कार्यालय, पूजा स्थल या तिजोरी में स्थापित किया जाता है।

 

बगलामुखी यंत्र के लाभ

  • शत्रुओं की बुरी शक्तियों को निष्क्रिय करता है।
  • मुकदमे और कानूनी मामलों में सफलता मिलती है।
  • व्यापार और करियर में सफलता दिलाता है।
  • आत्मबल, वाणी पर नियंत्रण और प्रभावशाली व्यक्तित्व देता है।
  • राजनीति और प्रशासनिक कार्यों में विजय प्राप्त होती है।

 

बगलामुखी यंत्र की स्थापना और पूजा विधि

  • इसे गुरुवार के दिन शुभ मुहूर्त में स्थापित करें।
  • पीले वस्त्र पर रखकर इसे केसर और हल्दी मिले जल से शुद्ध करें।
  • यंत्र पर पीले पुष्प, चंदन और धूप-दीप अर्पित करें।
  • बगलामुखी मंत्र का जाप करें –
    ह्लीं बगलामुखि सर्वदुष्टानां वाचं मुखं पदं स्तम्भय जिव्हां कीलय बुद्धिं विनाशय ह्लीं स्वाहा।
  • प्रतिदिन पूजा करके देवी की कृपा प्राप्त करें।

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