भगवान दत्तात्रेय कौन हैं?
भगवान दत्तात्रेय त्रिदेवों—ब्रह्मा, विष्णु और महेश के संयुक्त अवतार हैं। वे योग, ज्ञान, भक्ति और सिद्धियों के दाता माने जाते हैं। उनकी उपासना करने से आध्यात्मिक उन्नति, आत्मशुद्धि, मानसिक शांति और सभी प्रकार की बाधाओं से मुक्ति मिलती है।
भगवान दत्तात्रेय का स्वरूप
- उनके तीन सिर होते हैं, जो ब्रह्मा, विष्णु और महेश का प्रतीक हैं।
- उनके छह हाथों में माला, त्रिशूल, शंख, चक्र, कमंडल और डमरू होते हैं।
- वे एक गौ (गाय) के साथ होते हैं, जो माँ पृथ्वी और पवित्रता का प्रतीक है।
- उनके चारों ओर चार कुत्ते होते हैं, जो चार वेदों का प्रतीक हैं।
- वे ध्यान, तपस्या और ज्ञान के दिव्य स्रोत हैं।
भगवान दत्तात्रेय की पूजा का महत्व
- आध्यात्मिक जागृति और आत्मज्ञान प्राप्त होता है।
- बुरी शक्तियों और नकारात्मक ऊर्जा से रक्षा होती है।
- शत्रु बाधा, ग्रह दोष और पितृ दोष का निवारण होता है।
- मानसिक शांति, आत्मविश्वास और सकारात्मकता बढ़ती है।
- साधना, योग और भक्ति में सफलता प्राप्त होती है।
भगवान दत्तात्रेय की पूजा के लाभ
- सभी प्रकार की बाधाएँ और कष्ट दूर होते हैं।
- आध्यात्मिक और मानसिक उन्नति होती है।
- शिक्षा, ज्ञान और बुद्धि की वृद्धि होती है।
- पारिवारिक सुख-शांति और समृद्धि प्राप्त होती है।
- आध्यात्मिक साधकों और योगियों के लिए विशेष रूप से फलदायी है।
दत्तात्रेय यंत्र क्या है?
दत्तात्रेय यंत्र भगवान दत्तात्रेय की दिव्य ऊर्जा से संचारित एक शक्तिशाली यंत्र है, जो साधकों को ज्ञान, आध्यात्मिक शक्ति, शत्रु नाश और सभी प्रकार के ग्रह दोषों से मुक्ति प्रदान करता है। इसे घर, व्यापार स्थल, पूजा स्थान या साधना कक्ष में स्थापित किया जाता है।
दत्तात्रेय यंत्र के लाभ
- बुरी शक्तियों, ग्रह दोषों और पितृ दोषों से मुक्ति मिलती है।
- मानसिक शांति, आत्मज्ञान और ध्यान में प्रगति होती है।
- शिक्षा, विद्या और आध्यात्मिक उन्नति प्राप्त होती है।
- परिवार में सुख-शांति और समृद्धि बनी रहती है।
- योग, साधना और तंत्र-मंत्र में सफलता प्राप्त होती है।
दत्तात्रेय यंत्र की स्थापना और पूजा विधि
- इसे गुरुवार के दिन शुभ मुहूर्त में स्थापित करें।
- गंगाजल से शुद्ध करें और पीले वस्त्र पर स्थापित करें।
- यंत्र पर चंदन, हल्दी, पुष्प और धूप-दीप अर्पित करें।
- भगवान दत्तात्रेय के मंत्र का जाप करें –
ॐ द्रां दत्तात्रेयाय स्वाहा। - प्रतिदिन इस यंत्र के समक्ष प्रार्थना करें और गुरुवार का व्रत रखें।