देवी लक्ष्मी – धन, ऐश्वर्य और समृद्धि की देवी
देवी लक्ष्मी को धन, ऐश्वर्य, सुख-समृद्धि और सौभाग्य की देवी माना जाता है। वे भगवान विष्णु की शक्ति हैं और उनकी कृपा से जीवन में आर्थिक उन्नति, वैभव और सुख-शांति आती है।
कनकधारा स्तोत्र का विशेष महत्व है, जिसे आदि शंकराचार्य ने देवी लक्ष्मी को प्रसन्न करने के लिए रचा था। इस स्तोत्र के प्रभाव से धन की प्राप्ति होती है और गरीबी दूर होती है।
देवी लक्ष्मी की विशेषताएँ
- उनके चार हाथ धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष के प्रतीक हैं।
- हाथ से स्वर्ण और धन वर्षा करती हैं, जिससे धन-धान्य की प्राप्ति होती है।
- कमल पर विराजमान हैं, जो आध्यात्मिक एवं भौतिक उन्नति का संकेत देता है।
- उनकी कृपा से कर्ज, दरिद्रता और आर्थिक समस्याएँ समाप्त होती हैं।
मंत्र:
ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं महालक्ष्म्यै नमः॥
कनकधारा लक्ष्मी यंत्र – धन और वैभव प्राप्ति का शक्तिशाली यंत्र
कनकधारा लक्ष्मी यंत्र देवी लक्ष्मी की कृपा प्राप्त करने और आर्थिक समृद्धि बढ़ाने के लिए उपयोग किया जाता है। यह यंत्र विशेष रूप से उन लोगों के लिए लाभकारी है, जिन्हें धन की समस्याएँ, कर्ज, व्यापार में घाटा या आर्थिक अस्थिरता का सामना करना पड़ रहा हो।
कनकधारा लक्ष्मी यंत्र के लाभ
- अचानक धन प्राप्ति और स्थायी समृद्धि का आशीर्वाद।
- आर्थिक समस्याओं और कर्ज से मुक्ति।
- व्यापार और व्यवसाय में सफलता।
- घर-परिवार में सुख-शांति और सौभाग्य की वृद्धि।
- धन, सोना और अन्य संपत्तियों में वृद्धि।
कनकधारा लक्ष्मी यंत्र की स्थापना और पूजा विधि
- शुभ मुहूर्त – दीपावली, अक्षय तृतीया, पूर्णिमा या शुक्रवार को स्थापना करें।
- स्थान – इसे घर, तिजोरी, दुकान या व्यापार स्थल में रखें।
- शुद्धि – यंत्र को गंगाजल, केसर और चंदन से शुद्ध करें।
- अर्चना – देवी लक्ष्मी को कमल पुष्प, लाल वस्त्र, हल्दी-कुमकुम और दीप अर्पित करें।
- मंत्र जाप –
- ॐ ह्रीं कनकधारायै नमः मंत्र का 108 बार जाप करें।
- ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं महालक्ष्म्यै नमः मंत्र का जप करें।
- विशेष उपाय –
- शुक्रवार को गरीबों को दान करें।
- देवी लक्ष्मी को खीर, बताशे और तुलसी पत्र अर्पित करें।
- श्रीसूक्त और कनकधारा स्तोत्र का पाठ करें।