Ketu Yantra

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केतु देव कौन हैं?

केतु देव नवग्रहों में एक छायाग्रह हैं, जो आध्यात्मिकता, रहस्यमयी शक्तियों, मोक्ष, तंत्र-साधना, मानसिक संतुलन और अदृश्य प्रभावों के कारक माने जाते हैं। केतु को अनिश्चितताओं, रहस्यों और अचानक होने वाली घटनाओं का स्वामी माना जाता है। यदि केतु शुभ हो तो व्यक्ति को आध्यात्मिक शक्ति, तीव्र अंतर्ज्ञान, शोध कार्यों में सफलता और मानसिक स्थिरता मिलती है, लेकिन यदि अशुभ हो तो भ्रम, मानसिक अस्थिरता, दुर्घटनाएँ, संतान संबंधी समस्याएँ और आध्यात्मिक भटकाव जैसी परेशानियाँ आ सकती हैं।

 

केतु देव का स्वरूप

केतु को बिना सिर वाला ग्रह माना जाता है। पुराणों के अनुसार, वे राहु के धड़ से बने हैं। इन्हें धूम्रवर्ण, रहस्यमयी और अनिश्चितताओं से जुड़ा माना जाता है। इनका वाहन अश्व (घोड़ा) है, और वे आध्यात्मिक शक्ति, रहस्य, तपस्या और साधना के प्रतीक हैं।

 

केतु देव का महत्व

  • मोक्ष, आध्यात्मिक ज्ञान, साधना और तंत्र-मंत्र का कारक ग्रह।
  • छठी इंद्रिय, अदृश्य शक्तियाँ और रहस्यमयी घटनाओं को नियंत्रित करता है।
  • आकस्मिक लाभ, शोध कार्य और वैज्ञानिक सोच को प्रभावित करता है।
  • दुर्घटनाएँ, मानसिक भ्रम, संतान कष्ट और अचानक बदलाव भी दर्शाता है।
  • ध्यान, योग, तपस्या और परोपकार की प्रवृत्ति बढ़ाता है।

 

केतु दोष और उसका प्रभाव

जब केतु अशुभ स्थिति में होता है, तो इसे केतु दोष कहा जाता है। इसके कारण व्यक्ति को मानसिक अस्थिरता, भ्रम, दुर्घटनाओं, संतान संबंधी परेशानियों, आर्थिक अस्थिरता और आध्यात्मिक भटकाव का सामना करना पड़ सकता है।

 

केतु दोष के उपाय

  • शनिवार या मंगलवार के दिन केतु देव की पूजा करें।
  • काले तिल, सफेद वस्त्र, चंदन और नारियल का दान करें।
  • केतु मंत्र का जाप करें – स्त्रां स्त्रीं स्त्रौं सः केतवे नमः
  • गणेश जी की पूजा करें और दुर्गा सप्तशती का पाठ करें।
  • कुत्ते को भोजन कराएँ और केतु यंत्र की स्थापना करें।

 

 केतु यंत्र क्या है?

केतु यंत्र एक विशेष ज्यामितीय यंत्र है, जो केतु ग्रह के नकारात्मक प्रभावों को दूर करने और मानसिक शांति, आध्यात्मिक उन्नति, शोध में सफलता तथा तंत्र-साधना में सिद्धि प्राप्त करने के लिए उपयोग किया जाता है। इसे घर, कार्यालय या पूजा स्थल पर रखा जाता है।

 

केतु यंत्र के लाभ

  • केतु ग्रह के अशुभ प्रभाव को समाप्त करता है।
  • मानसिक भ्रम और अस्थिरता को दूर करता है।
  • आध्यात्मिक उन्नति, योग और साधना में सहायता करता है।
  • आकस्मिक दुर्घटनाओं और नकारात्मक ऊर्जा से बचाता है।
  • शोध कार्य, वैज्ञानिक सोच और तंत्र-मंत्र में सफलता दिलाता है।

 

केतु यंत्र की स्थापना और पूजा विधि

  • इसे शनिवार या मंगलवार के दिन शुभ मुहूर्त में स्थापित करें।
  • यंत्र को पूजा स्थान, अध्ययन कक्ष या ऑफिस में रखें।
  • प्रतिदिन केतु मंत्र का जाप करें।
  • यंत्र पर काले तिल, चंदन, नारियल और दीपक अर्पित करें।
  • गणेश जी की पूजा करें और शिवलिंग पर जल चढ़ाएँ।

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