भगवान विश्वकर्मा – सृजन और निर्माण के देवता
भगवान विश्वकर्मा को सृष्टि के दिव्य शिल्पकार और महान वास्तुशास्त्री माना जाता है। वे देवताओं के महलों, अस्त्र-शस्त्रों, विमानों और दिव्य नगरों के निर्माता हैं। विश्वकर्मा जी की पूजा विशेष रूप से वास्तुकारों, इंजीनियरों, कारीगरों, निर्माण कार्य से जुड़े लोगों, उद्योगपतियों और व्यापारियों द्वारा की जाती है।
भगवान विश्वकर्मा की विशेषताएँ:
- निर्माण, वास्तु, शिल्प और तकनीकी कौशल के अधिष्ठाता देवता।
- उद्योगों, फैक्ट्रियों, मशीनों और तकनीकी कार्यों के संरक्षक।
- श्रमिकों, कारीगरों, और व्यापारियों को सफलता और समृद्धि प्रदान करते हैं।
- वास्तु दोषों को दूर कर घर और कार्यस्थल में सकारात्मक ऊर्जा बनाए रखते हैं।
- नई तकनीकों और आविष्कारों में सफलता दिलाते हैं।
मंत्र:
ॐ विश्वकर्मणे नमः
विश्वकर्मा यंत्र – सफलता और समृद्धि का प्रतीक
विश्वकर्मा यंत्र भगवान विश्वकर्मा का पवित्र यंत्र है, जो निर्माण, तकनीकी कार्यों, उद्योगों और व्यापार में सफलता प्रदान करता है। यह यंत्र वास्तु दोषों को दूर कर घर, ऑफिस, फैक्ट्री और उद्योगों में सकारात्मक ऊर्जा बनाए रखता है।
विश्वकर्मा यंत्र के लाभ:
- व्यापार, उद्योग और निर्माण कार्यों में सफलता प्रदान करता है।
- फैक्ट्री, मशीनरी और टेक्नोलॉजी से जुड़े कार्यों में उन्नति दिलाता है।
- वास्तु दोषों को समाप्त कर सकारात्मक ऊर्जा को बढ़ाता है।
- श्रमिकों, इंजीनियरों, और कारीगरों को दक्षता और समृद्धि प्रदान करता है।
- व्यापारिक और औद्योगिक विकास में सहायक होता है।
विश्वकर्मा यंत्र की स्थापना और पूजा विधि
- शुभ मुहूर्त – विश्वकर्मा जयंती, दिवाली, या किसी शुभ तिथि पर स्थापित करें।
- स्थान – इसे घर, ऑफिस, फैक्ट्री, मशीनरी क्षेत्र, या कार्यस्थल पर रखें।
- शुद्धि – यंत्र को गंगाजल, कुमकुम और हल्दी से शुद्ध करें।
- अर्चना – भगवान विश्वकर्मा को पीले पुष्प, धूप, दीप, और नैवेद्य अर्पित करें।
- मंत्र जाप –
- ॐ विश्वकर्मणे नमः मंत्र का 108 बार जाप करें।
- श्री सूक्त और विश्वकर्मा स्तोत्र का पाठ करें।
- विशेष उपाय –
- फैक्ट्री या कार्यस्थल में नियमित रूप से हवन करें।
- कामकाज के स्थान पर साफ-सफाई और सकारात्मक वातावरण बनाए रखें।
- मेहनतकश लोगों को सम्मान और सहयोग दें।